ट्रम्प की कॉल्स अनसुनी: टैरिफ विवाद में मोदी ने दिखाई कड़ाई

अमर शर्मा

नई दिल्ली। भारत-अमेरिका के रिश्तों में इन दिनों तनाव का नया दौर देखने को मिल रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लगातार चार टेलीफोन कॉल्स को रिसीव करने से इनकार कर दिया। यह घटनाक्रम उस समय हुआ है जब दोनों देशों के बीच टैरिफ विवाद गहराता जा रहा है।

सूत्रों का दावा है कि अमेरिका ने भारत के रूसी कच्चे तेल के आयात को लेकर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ भारतीय निर्यात पर लगा दिया है। इस कदम ने रिश्तों में और खटास पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि कभी “21वीं सदी की सबसे अहम साझेदारी” कही जाने वाली इस दोस्ती में अब ठंडापन साफ झलकने लगा है।

जर्मन और जापानी मीडिया ने अपनी रिपोर्टों में लिखा है कि ट्रम्प लगातार मोदी से बात करना चाहते थे, लेकिन भारतीय पक्ष ने कॉल रिसीव करने से परहेज किया। भारतीय राजनयिक विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री को आशंका थी कि ट्रम्प संवेदनशील मुद्दों—खासकर पाकिस्तान से जुड़े मामलों—को गलत तरीके से पेश कर सकते हैं।

गौरतलब है कि ट्रम्प ने पहले भी दावा किया था कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच संभावित “परमाणु टकराव” को व्यापारिक दबाव डालकर रोका। भारत सरकार ने उस दावे को झूठा और निराधार बताया था।

रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि ट्रम्प ने कनाडा में हुए जी-20 सम्मेलन के बाद जून के अंत में मोदी को वॉशिंगटन आमंत्रित किया था, लेकिन भारत ने अंतिम क्षणों में इस आमंत्रण को ठुकरा दिया। सूत्रों के मुताबिक, ट्रम्प चाहते थे कि मोदी और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को व्हाइट हाउस में एक साथ बुलाकर खुद को मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत करें। नई दिल्ली ने इस कोशिश का कड़ा विरोध करते हुए इसे “आतंकवाद के पीड़ित और आतंकवाद के पोषक को एक समान मंच पर लाने का प्रयास” बताया।

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने भी कहा कि भारत खुद को “गंभीर रूप से उपेक्षित” महसूस कर रहा है। उनके मुताबिक, वाशिंगटन ने रूस और चीन पर उतना दबाव नहीं बनाया, जितना भारत पर डाला जा रहा है। बोल्टन ने चेतावनी दी कि “जितना ज्यादा भारत को लटकाया जाएगा, उतना ही दोनों देशों के रिश्ते बिगड़ेंगे।”

 

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