पद्म विभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र नहीं रहे, 89 वर्ष की आयु में वाराणसी में अंतिम संस्कार आज
वाराणसी/मिर्जापुर
हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत जगत को गहरा आघात पहुंचा है। बनारस घराने के वरिष्ठ शास्त्रीय गायक और पद्म विभूषण सम्मानित पंडित छन्नूलाल मिश्र का गुरुवार तड़के निधन हो गया। वह 89 वर्ष के थे और पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे।
परिजनों के अनुसार, बुधवार देर रात उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां सुबह करीब 4 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी पुत्री नम्रता मिश्र ने बताया कि पिछले 17-18 दिनों से वह उम्र संबंधी रोगों से जूझ रहे थे और उपचार के बाद घर पर ही उनका निधन हुआ।
पंडित मिश्र पिछले कुछ समय से मिर्जापुर में अपनी सबसे छोटी पुत्री के परिवार के साथ रह रहे थे। वे अपने पुत्र, तबला वादक रामकुमार मिश्र और तीन पुत्रियों के परिवार को छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी का निधन चार वर्ष पूर्व हो चुका था।
बनारस घराने की थुमरी परंपरा के दिग्गज
1936 में आजमगढ़ में जन्मे पंडित छन्नूलाल मिश्र ने अपने पिता बद्री प्रसाद मिश्र से प्रारंभिक शिक्षा ली। आगे चलकर उन्होंने किराना घराने के उस्ताद अब्दुल गनी खां और ठाकुर जयदेव सिंह से संगीत की बारीकियां सीखीं।
वे ठुमरी के पूरब अंग के प्रतिनिधि माने जाते थे और खयाल, दादरा, चैती, कजरी और भजन जैसे कई रूपों को अपनी गायकी से नई पहचान दी।
सम्मान और उपलब्धियां
पंडित मिश्र को 2010 में पद्म भूषण और 2020 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। अपनी अद्भुत गायकी और समर्पण के कारण वे न सिर्फ बनारस बल्कि देशभर में शास्त्रीय संगीत के पर्याय बन गए थे।
अंतिम संस्कार वाराणसी में
परिवार ने बताया कि पंडित मिश्र का अंतिम संस्कार आज शाम 5 बजे वाराणसी में किया जाएगा। उनके निधन से संगीत जगत में शोक की लहर है और कलाकारों ने इसे भारतीय शास्त्रीय परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।